लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां स्थित प्राथमिक विद्यालय नेवाजखेड़ा में बच्चों को मिलने वाली पाठ्यपुस्तकों को कबाड़ी को बेच देने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो सामने आने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
बताया जा रहा है कि यह वीडियो किसी स्थानीय व्यक्ति ने बनाया, जिसमें स्कूल परिसर में रखी नई और उपयोग योग्य किताबों को कबाड़ी को सौंपते हुए देखा जा सकता है। हैरानी की बात यह है कि एक ओर जहां लखनऊ जिले के नगर और ग्रामीण इलाकों के करीब 20 प्रतिशत प्राथमिक स्कूलों में बच्चों को अभी तक सिलेबस की सभी किताबें नहीं मिल पाई हैं, वहीं नेवाजखेड़ा स्कूल में अतिरिक्त किताबें होते हुए भी उन्हें जरूरतमंद बच्चों या अन्य स्कूलों को देने की बजाय बेच दिया गया।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, स्कूल में लंबे समय से किताबों के रखरखाव और वितरण में लापरवाही बरती जा रही थी। जब किताबों को कबाड़ी के हवाले किया गया तो किसी ने इसका वीडियो बना लिया, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो वायरल होने के बाद अभिभावकों और शिक्षा से जुड़े लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि सरकार बच्चों की शिक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी ही व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
इस मामले पर बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) लखनऊ ने संज्ञान लेते हुए खंड शिक्षा अधिकारी को तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह मामला गंभीर लापरवाही और सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग का प्रतीत होता है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित प्रधानाध्यापक और अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी, जिसमें निलंबन और एफआईआर तक की कार्रवाई संभव है।
शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शासन की स्पष्ट गाइडलाइन है कि यदि किसी स्कूल में अतिरिक्त किताबें बचती हैं तो उन्हें दूसरे जरूरतमंद स्कूलों में भेजा जाना चाहिए या विभाग को सूचित किया जाना चाहिए। किताबों को बेचना पूरी तरह से नियमों के खिलाफ है। इससे न सिर्फ सरकारी धन का नुकसान होता है, बल्कि उन बच्चों का भी हक मारा जाता है जिन्हें समय पर किताबें नहीं मिल पातीं।
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी स्कूलों में संसाधनों के सही उपयोग और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि पूरे जिले में किताबों के वितरण और रिकॉर्ड की विशेष ऑडिट कराई जाए, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
फिलहाल शिक्षा विभाग की टीम स्कूल पहुंचकर स्टॉक रजिस्टर, वितरण सूची और कबाड़ी को बेची गई किताबों की जानकारी जुटा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह लापरवाही थी या जानबूझकर किया गया भ्रष्टाचार। लेकिन इतना तय है कि वायरल वीडियो ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।