उत्तर प्रदेश के लखनऊ जिले से नए साल की रात एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां कानून की रक्षा करने वाला ही कानून तोड़ता नजर आया। आरोप है कि बाराबंकी में तैनात दरोगा अमित जायसवाल नशे की हालत में पुलिस चेकिंग के दौरान जमकर हंगामा करने लगे। यह घटना 31 दिसंबर की देर रात करीब 1:30 बजे की बताई जा रही है, जब वह नए साल का जश्न मनाने के लिए लखनऊ आया हुआ था और वहां से वापस लौट रहा था।
नए साल के मद्देनजर जिले में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर था। ट्रैफिक कंट्रोल और शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई के लिए जगह-जगह बैरिकेडिंग कर वाहनों की सघन जांच की जा रही थी। इसी दौरान दरोगा अमित जायसवाल की कार को चेकिंग के लिए रोका गया। आरोप है कि वह अत्यधिक नशे में थे और चेकिंग कर रहे ट्रैफिक पुलिसकर्मियों से उलझ गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दरोगा ने पहले तो पुलिसकर्मियों से अभद्र भाषा का प्रयोग किया और फिर गुस्से में आकर बैरिकेडिंग पर ही अपनी कार चढ़ा दी। इस घटना से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। पुलिसकर्मियों ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया, लेकिन दरोगा का हंगामा लगातार बढ़ता गया।
घटना की सूचना मिलते ही मौके पर डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) भी पहुंच गए। बताया जा रहा है कि दरोगा ने DCP के साथ भी बहस की और उनके साथ भी दुर्व्यवहार किया। हालांकि, जैसे ही उसे यह एहसास हुआ कि सामने मौजूद अधिकारी DCP रैंक के हैं, उसका रवैया बदल गया और वह शांत हो गया।
इसके बाद DCP ने तत्काल सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित दरोगा और उसकी गाड़ी को हजरतगंज कोतवाली भेज दिया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूरे मामले की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी गई है। नशे में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों से अभद्रता और बैरिकेडिंग तोड़ने जैसे गंभीर आरोपों को देखते हुए दरोगा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस विभाग की कार्यशैली और अनुशासन पर सवाल खड़े हो गए हैं। आम नागरिकों का कहना है कि जब कानून का पालन कराने वाले अधिकारी ही नियमों का उल्लंघन करेंगे, तो जनता में गलत संदेश जाएगा। वहीं, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून सभी के लिए बराबर है और दोषी पाए जाने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नशेबाज दरोगा के खिलाफ प्रशासन आगे क्या सख्त कदम उठाता है। नए साल के जश्न के बीच हुई इस घटना ने पुलिस विभाग की जिम्मेदारी और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।