आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह आंख खुलते ही मोबाइल और रात को सोने से पहले आखिरी नजर भी स्क्रीन पर ही जाती है। खासतौर पर युवाओं और कामकाजी लोगों में यह आदत आम हो गई है कि वे कमरे की लाइट बंद कर देर रात तक मोबाइल स्क्रॉल करते रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आदत आपकी आंखों की रोशनी के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है?
नेत्र रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, अंधेरे में मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली तेज रोशनी आंखों पर सीधा दबाव डालती है। इससे आंखों की पुतलियां असामान्य रूप से फैलती और सिकुड़ती हैं, जिससे आंखों के अंदर दबाव (Intraocular Pressure) बढ़ सकता है। यही बढ़ा हुआ दबाव आगे चलकर ग्लूकोमा जैसी गंभीर बीमारी की वजह बन सकता है।
ग्लूकोमा को चिकित्सा विज्ञान में ‘साइलेंट किलर ऑफ विज़न’ यानी दृष्टि का खामोश चोर कहा जाता है। इसकी सबसे बड़ी समस्या यह है कि शुरुआती चरण में इसके लक्षण बेहद मामूली या बिल्कुल नहीं होते। व्यक्ति को तब तक पता नहीं चलता, जब तक आंखों की नसों को स्थायी नुकसान नहीं हो जाता। एक बार ग्लूकोमा से हुई दृष्टि हानि को वापस लाना लगभग असंभव होता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि लगातार मोबाइल या लैपटॉप देखने से आंखों में थकान, जलन, सूखापन और सिरदर्द जैसी समस्याएं तो होती ही हैं, लेकिन लंबे समय तक ऐसा करने से आंखों की ऑप्टिक नर्व पर भी असर पड़ता है। रात के अंधेरे में स्क्रीन देखने से आंखों को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे धीरे-धीरे आंखों की संरचना कमजोर हो सकती है।
डिजिटल डिवाइसेज़ से निकलने वाली ब्लू लाइट भी आंखों के लिए नुकसानदायक मानी जाती है। यह न सिर्फ नींद के चक्र को बिगाड़ती है, बल्कि रेटिना और ऑप्टिक नर्व को भी प्रभावित कर सकती है। अगर परिवार में किसी को पहले से ग्लूकोमा, डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, तो ऐसे लोगों में जोखिम और भी बढ़ जाता है।
नेत्र विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मोबाइल का इस्तेमाल हमेशा पर्याप्त रोशनी में करें। सोने से कम से कम 30 से 60 मिनट पहले स्क्रीन देखना बंद कर दें। 20-20-20 नियम अपनाएं, यानी हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें। इसके अलावा साल में एक बार आंखों की पूरी जांच जरूर कराएं, खासकर 40 साल की उम्र के बाद।
अगर आंखों में बार-बार दर्द, धुंधला दिखना, सिरदर्द या रोशनी के चारों ओर घेरा दिखने जैसी समस्या हो, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय रहते सावधानी और सही आदतें अपनाकर आप ग्लूकोमा जैसी गंभीर बीमारी से अपनी आंखों की रोशनी बचा सकते हैं।