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**कोल्ड स्टोरेज भरे, आवक बढ़ी तो औंधे मुंह गिरे आलू के दाम**

**आलू का निकला दम, दाम हुए लागत से भी कम**

देश के प्रमुख आलू उत्पादक राज्यों में इन दिनों किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। बाजार में आलू की आवक बढ़ने के साथ ही इसके दाम लागत से भी नीचे चले गए हैं। हालात ऐसे हैं कि किसान अपनी उपज को सड़कों पर फेंकने या औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों की प्रमुख मंडियों में आलू के भाव तेजी से गिर चुके हैं।

उत्तर प्रदेश की प्रमुख मंडी आगरा में जहां एक महीने पहले आलू के दाम 900 से 1250 रुपये प्रति क्विंटल तक थे, वहीं अब यह घटकर 500 से 650 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं। इसी तरह कोलकाता मंडी में आलू का भाव 1500–1550 रुपये से गिरकर 1100–1200 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया है। इंदौर में कीमतें 500–1400 रुपये से गिरकर 300–900 रुपये तक पहुंच चुकी हैं, जबकि लुधियाना और दिल्ली जैसी बड़ी मंडियों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है।

कोल्ड स्टोरेज बने संकट की वजह

व्यापारियों के अनुसार इस समय कोल्ड स्टोरेज से आलू की भारी निकासी हो रही है। पिछले साल की तुलना में इस बार कोल्ड स्टोरेज में ज्यादा आलू जमा हुआ था। जैसे-जैसे स्टोरेज खाली किए जा रहे हैं, बाजार में आवक बढ़ती जा रही है, जिससे दामों पर दबाव बना हुआ है।

दिल्ली आजादपुर मंडी के व्यापारियों का कहना है कि रोजाना 130 से 140 गाड़ियां आलू लेकर मंडी पहुंच रही हैं। वहीं, कोल्ड स्टोरेज में अभी भी लाखों बोरी आलू भरा हुआ है, जिसके कारण आने वाले दिनों में कीमतों में और गिरावट की आशंका है।

किसानों को नहीं मिल रही लागत

किसानों का कहना है कि आलू की खेती में प्रति क्विंटल लागत 700 से 800 रुपये तक आती है, जबकि मंडियों में उन्हें 500 रुपये या उससे भी कम दाम मिल रहे हैं। इससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई किसान कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं।

उत्पादन बढ़ा, मांग रही कमजोर

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक इस साल मौसम अनुकूल रहने से आलू का उत्पादन बढ़ा है। अनुमान है कि देश में आलू उत्पादन में 5 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। लेकिन खपत और निर्यात में अपेक्षित वृद्धि न होने से बाजार में असंतुलन पैदा हो गया है।

आने वाले दिनों में राहत की उम्मीद

हालांकि व्यापारियों का मानना है कि जैसे-जैसे कोल्ड स्टोरेज खाली होंगे और पुराना स्टॉक खत्म होगा, वैसे-वैसे कीमतों में सुधार देखने को मिल सकता है। लेकिन फिलहाल किसानों के लिए हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।

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