इलाहाबाद हाईकोर्ट ने GST व्यवस्था से जुड़े एक बेहद अहम मामले में करदाताओं के पक्ष में बड़ा और राहतभरा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि केवल GST पोर्टल पर नोटिस या आदेश अपलोड कर देना, जब तक करदाता को उसकी विधिवत जानकारी न दी जाए, कानूनी रूप से पूर्ण सूचना नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में करदाताओं के अपील करने की समय-सीमा नोटिस की वास्तविक जानकारी मिलने के बाद ही शुरू मानी जाएगी।
यह महत्वपूर्ण टिप्पणी न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव ने एम/एस बिवेस बीकॉन एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड समेत कुल 13 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए दी। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि GST विभाग द्वारा पोर्टल पर नोटिस और अंतिम आदेश अपलोड तो किए गए, लेकिन उनकी उन्हें कोई वास्तविक या व्यक्तिगत जानकारी नहीं दी गई। इसी कारण वे निर्धारित समय में अपील दाखिल नहीं कर सके।
कोर्ट ने इस दलील को पूरी तरह स्वीकार करते हुए कहा कि न्याय के मूल सिद्धांतों के अनुसार किसी भी व्यक्ति को उसके खिलाफ पारित आदेश की जानकारी मिलना अनिवार्य है। बिना जानकारी के पारित आदेशों को एकतरफा (Ex-parte) माना जाएगा और ऐसे आदेशों के आधार पर करदाताओं के अपील अधिकार समाप्त नहीं किए जा सकते।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी करदाता को यह ही पता नहीं है कि उसके खिलाफ कोई आदेश पारित हुआ है, तो उससे यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह समय-सीमा के भीतर अपील करे। इस आधार पर कोर्ट ने विभाग की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि चूंकि आदेश पोर्टल पर उपलब्ध था, इसलिए अपील की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है।
कोर्ट ने इस मामले में भाषा और डिजिटल प्रणाली से जुड़े एक बेहद व्यावहारिक पहलू पर भी गंभीर टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में, जहां हिंदी मुख्य भाषा है, वहां केवल अंग्रेज़ी में GST पोर्टल पर नोटिस और आदेश अपलोड करना ग्रामीण और मध्यम व्यापारियों के लिए गंभीर समस्या पैदा करता है। कई छोटे व्यापारी नियमित रूप से पोर्टल चेक नहीं कर पाते, जिससे उन्हें महत्वपूर्ण कानूनी सूचनाएं समय पर नहीं मिल पातीं।
कोर्ट ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार के कई विभाग आज भी महत्वपूर्ण मामलों में भौतिक (Physical) नोटिस भेजते हैं, जबकि राज्य स्तर पर अधिकारी पूरी तरह डिजिटल माध्यम पर निर्भर हो गए हैं। यह असंतुलन करदाताओं के अधिकारों को प्रभावित कर रहा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इन सभी मामलों में GST विभाग द्वारा पारित एकतरफा आदेशों को रद्द कर दिया। साथ ही करदाताओं को यह राहत दी कि वे अब दोबारा अपील दाखिल कर सकते हैं। हालांकि कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि अपील दाखिल करने से पहले विवादित टैक्स राशि का 10 प्रतिशत जमा करना होगा, जिसके बाद मामलों की नई सिरे से सुनवाई की जाएगी।
यह फैसला खास तौर पर छोटे व्यापारियों, ग्रामीण उद्यमियों और उन करदाताओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिन्हें तकनीकी कारणों या जानकारी के अभाव में GST पोर्टल पर जारी नोटिसों की समय पर जानकारी नहीं मिल पाती। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में GST प्रशासन को अधिक पारदर्शी, संवेदनशील और करदाता-हितैषी बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।