लखनऊ/आगरा।देश में अब तक के सबसे बड़े जीएसटी घोटालों में से एक का पर्दाफाश हुआ है। लगभग 500 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी के मामले में स्टेट टैक्स विभाग और एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि लखनऊ निवासी अमित शर्मा के नाम पर आगरा में एक फर्म रजिस्टर्ड कराई गई, जिसका इस्तेमाल फर्जी बिलिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की अवैध निकासी के लिए किया गया।
एसटीएफ की जांच के अनुसार इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे हरियाणा का संगठित गिरोह काम कर रहा था। गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित था। यह गिरोह लोगों के नाम पर फर्जी या शेल कंपनियां रजिस्टर कराता और फिर उन कंपनियों को 25 प्रतिशत कमीशन पर इस्तेमाल करता था। जांच में सामने आया है कि गिरोह ने देश के अलग-अलग राज्यों में 200 से अधिक फर्जी फर्में खड़ी कर रखी थीं।
जांच एजेंसियों को तब और बड़ा झटका लगा जब यह सामने आया कि एक ही मोबाइल नंबर से 96 फर्मों का संचालन किया जा रहा था। इससे साफ हो गया कि यह घोटाला किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा है। फर्जी फर्मों के जरिए केवल कागजों पर खरीद-फरोख्त दिखाई जाती थी और बिना वास्तविक लेन-देन के ही करोड़ों रुपये का आईटीसी क्लेम किया जाता था।
जांच में यह भी सामने आया कि दिलशाद नामक व्यक्ति की 10 वास्तविक फर्में थीं, जिनका कारोबार आयरन, स्टील, स्क्रैप, प्लास्टिक ट्रेडिंग, नॉन-फेरस मेटल और अन्य क्षेत्रों में था। इन्हीं वास्तविक फर्मों की आड़ में कई फर्जी कंपनियों को तकनीकी रूप से खड़ा किया गया और बड़े पैमाने पर फर्जी बिलिंग कर जीएसटी चोरी की गई।
एसटीएफ की जांच में जिस फर्म से 137 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी का खुलासा हुआ, वह फर्म अमित शर्मा के नाम पर रजिस्टर्ड थी। अमित शर्मा ने जांच एजेंसियों को बताया कि उसके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर फर्म रजिस्टर्ड कराई गई है। इस मामले में उसने संबंधित थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई है। अमित शर्मा मूल रूप से लखनऊ का निवासी बताया जा रहा है।
एसटीएफ ने इस मामले में दिलशाद, मनोज पटेल, अंकुर तिवारी, स्वतंत्र कुमार, वसीम, साजिद, जावेद और इकरामुद्दीन सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे शेल कंपनियों के माध्यम से फर्जी बिलिंग कर टैक्स चोरी करते थे और कमीशन के आधार पर फर्में उपलब्ध कराते थे।
अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल आगरा या लखनऊ तक सीमित नहीं है। जांच का दायरा अब अन्य राज्यों तक बढ़ाया जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि इस नेटवर्क के जरिए हजारों करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की गई हो सकती है। स्टेट टैक्स विभाग, एसटीएफ और अन्य केंद्रीय एजेंसियां अब बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन और मोबाइल डेटा की गहन जांच कर रही हैं।