उत्तर प्रदेश की नौकरशाही एक बार फिर बड़े भ्रष्टाचार आरोपों के घेरे में है। 1988 बैच के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी और पूर्व प्रसार भारती चेयरमैन नवनीत कुमार सहगल पर कथित तौर पर 112 करोड़ रुपये के “कट मनी सिस्टम” का संचालन करने के आरोप लगे हैं। एक 254 पन्नों की गोपनीय इनकम टैक्स (इन्वेस्टिगेशन विंग) रिपोर्ट और उस पर आधारित मीडिया खुलासों ने सूबे की प्रशासनिक व्यवस्था में हलचल मचा दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019-20 से 2021-22 के बीच उत्तर प्रदेश सरकार की कई महत्वाकांक्षी योजनाओं—खासकर वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी), विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, आईईडी और यूपी-कान जैसी संस्थाओं से जुड़े प्रशिक्षण, टूलकिट और कंसल्टेंसी कॉन्ट्रैक्ट्स—में एक संगठित “कट मनी सिस्टम” चलाया गया। जांच में दावा किया गया है कि इस सिस्टम के जरिए करीब 112 करोड़ रुपये का कथित कमीशन निकाला गया, जिसका अंतिम लाभार्थी सहगल बताए जा रहे हैं।
इनकम टैक्स रिपोर्ट में कमीशन प्राप्तकर्ता के रूप में “एनएस” नाम दर्ज होने, एक प्रतिष्ठान की गोपनीय डायरी में “एनएस” के साथ “लंबू” लिखे जाने, नकद लेन-देन, संदिग्ध शेल कंपनियों के माध्यम से संपत्ति खरीद, महंगे उपहारों के संदेश और कॉन्ट्रैक्ट भुगतान की चेन जैसे कई साक्ष्यों का उल्लेख है। रिपोर्ट में सहगल को इस कथित नेटवर्क के शीर्ष पर दिखाया गया है।
इन खुलासों के बाद कांग्रेस ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि सहगल को तीन वर्षों में 24 से 26 करोड़ रुपये तक की “कट मनी” मिली। पार्टी का दावा है कि आईईडी से लगभग 65 करोड़ और यूपी-कान से करीब 46 करोड़ रुपये की कथित वसूली हुई, जिसका बड़ा हिस्सा नौकरशाहों और बिचौलियों के बीच बांटा गया। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सवाल उठाया कि यदि आयकर विभाग की रिपोर्ट राज्य सरकार और लोकायुक्त तक पहुंच चुकी है, तो अब तक न तो यूपी सरकार ने ठोस कार्रवाई की और न ही प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण आया।
आरोप सार्वजनिक होने के कुछ ही समय बाद नवनीत सहगल ने प्रसार भारती चेयरमैन पद से कार्यकाल पूरा होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया। इस कदम ने सियासी और प्रशासनिक गलियारों में अटकलों को और तेज कर दिया। सोशल मीडिया पर इनकम टैक्स डॉसियर, मीडिया रिपोर्टें और राजनीतिक बयान तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे उच्च स्तर पर लिए गए फैसलों और जवाबदेही की कमी पर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सहगल सभी आरोपों से इनकार करते रहे हैं। उनका कहना है कि आयकर विभाग की जांच बंद हो चुकी है और उनके खिलाफ कोई मामला लंबित नहीं है। बावजूद इसके, यूपी कैडर की नौकरशाही में उनका नाम अब फुसफुसाहट से निकलकर खुली चर्चा का विषय बन गया है, जहां इसे “सिस्टमेटिक करप्शन” और “पोस्ट-रिटायरमेंट पोस्टिंग” की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
कौन हैं नवनीत सहगल
नवनीत सहगल को उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में तीन दशकों से अधिक समय तक सत्ता और प्रशासन के केंद्र में रहने वाला अफसर माना जाता है। उन्हें “हर मौसम का अफसर” और तीन अलग-अलग मुख्यमंत्रियों—मायावती, अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ—का भरोसेमंद संकट प्रबंधक कहा जाता रहा है।
मायावती सरकार (2007-12) में वे मुख्यमंत्री के सचिव समेत शहरी विकास और एस्टेट्स जैसे कई अहम विभागों के प्रभारी रहे। अखिलेश यादव के कार्यकाल में शुरुआती “सजा पोस्टिंग” के बाद उन्हें सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की कमान मिली और लखनऊ–आगरा एक्सप्रेसवे जैसे ड्रीम प्रोजेक्ट को रिकॉर्ड समय में पूरा कराने का श्रेय भी मिला। योगी सरकार में उन्होंने खादी एवं ग्रामोद्योग, एक्सपोर्ट प्रमोशन, ओडीओपी और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग संभाला तथा खेल विभाग के अपर मुख्य सचिव के रूप में स्पोर्ट्स पॉलिसी 2023 तैयार कर रिटायर हुए।
मार्च 2024 में उन्हें प्रसार भारती बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त किया गया, जिसे उनकी प्रशासनिक क्षमता और राजनीतिक स्वीकार्यता का संकेत माना गया। दिसंबर 2025 में उनका अचानक इस्तीफा और साथ ही उभरे भ्रष्टाचार के आरोपों ने यह संदेश दिया है कि अब शीर्ष स्तर के अफसर भी जांच और राजनीतिक दबाव से पूरी तरह अछूते नहीं हैं—हालांकि आधिकारिक तौर पर अब तक किसी ठोस अभियोजन या अनुशासनात्मक कार्रवाई की घोषणा नहीं हुई है।