मॉस्को।नए साल की पूर्व संध्या और 1 जनवरी की रात रूस के अहम तेल और ऊर्जा ढांचों पर सिलसिलेवार ड्रोन हमलों की खबर सामने आई है। रूसी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कालूगा क्षेत्र के ल्यूदिनोवो ऑयल डिपो और दक्षिणी रूस के क्रास्नोडार क्राय स्थित इल्स्की ऑयल रिफाइनरी को ड्रोन हमलों का निशाना बनाया गया, जिसके बाद दोनों ठिकानों पर आग लग गई। इन घटनाओं को रूस-यूक्रेन युद्ध में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की बढ़ती रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कालूगा क्षेत्र में स्थित ल्यूदिनोवो ऑयल डिपो पर देर रात ड्रोन गिरने के बाद आग भड़क उठी। आग की लपटें दूर से दिखाई दे रही थीं, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग को तुरंत अलर्ट किया गया। कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। रूसी अधिकारियों ने फिलहाल किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन तेल भंडारण से जुड़े ढांचे को नुकसान पहुंचने की बात स्वीकार की है।
इसी दौरान क्रास्नोडार क्राय की इल्स्की ऑयल रिफाइनरी में भी ड्रोन हमले के बाद आग लगने की सूचना मिली। यह रिफाइनरी रूस की महत्वपूर्ण तेल प्रसंस्करण इकाइयों में गिनी जाती है और घरेलू ईंधन आपूर्ति के साथ-साथ निर्यात में भी इसकी अहम भूमिका है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, सुरक्षा कारणों से रिफाइनरी के कुछ हिस्सों में काम अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध अब केवल सैन्य मोर्चों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक ढांचों पर भी इसका असर साफ दिखाई देने लगा है। तेल डिपो और रिफाइनरियों जैसे ठिकाने ईंधन आपूर्ति और सैन्य लॉजिस्टिक्स के लिए बेहद अहम होते हैं। ऐसे में इन पर हमले सीधे तौर पर युद्ध क्षमता और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं।
पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाने की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। यूक्रेन ने आरोप लगाया है कि रूस उसके बिजली संयंत्रों और गैस नेटवर्क पर हमले कर रहा है, जबकि रूस का कहना है कि उसके तेल और गैस ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए जा रहे हैं।
रूसी रक्षा मंत्रालय ने इन ड्रोन हमलों के लिए यूक्रेन समर्थित ताकतों को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, यूक्रेन की ओर से आधिकारिक तौर पर इन हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली गई है। नए साल की शुरुआत के साथ ही रूस ने अपने औद्योगिक और रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश जारी किए हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि इस तरह के हमले आगे भी जारी रहते हैं तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। रूस दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों में से एक है और उसकी सप्लाई में किसी भी तरह की रुकावट अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव ला सकती है।
नए साल की रात हुए ये ड्रोन हमले इस बात का संकेत माने जा रहे हैं कि रूस-यूक्रेन युद्ध एक नए और अधिक आक्रामक चरण में प्रवेश कर चुका है। जमीनी लड़ाई के साथ-साथ अब आर्थिक और ऊर्जा संसाधनों को कमजोर करने की रणनीति भी खुलकर सामने आ रही है।