उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित प्रसिद्ध कैंची धाम एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह है जेन-जी यानी 15 से 30 वर्ष की उम्र के युवाओं में बाबा नीब करौरी महाराज के प्रति बढ़ती आस्था। हाल के एक सर्वेक्षण के अनुसार, कैंची धाम आने वाले श्रद्धालुओं में सबसे बड़ा वर्ग युवाओं का है, जो इस आध्यात्मिक स्थल की ओर न केवल आस्था बल्कि आत्मिक शांति और जीवन दिशा की तलाश में खिंचे चले आ रहे हैं।
सर्वे में सामने आया है कि करीब 15 से 30 वर्ष आयु वर्ग के श्रद्धालु सबसे अधिक संख्या में कैंची धाम पहुंच रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से उत्तर प्रदेश, दिल्ली और बिहार से आने वाले युवा शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि लगभग 95 प्रतिशत श्रद्धालु विशुद्ध रूप से आध्यात्मिक उद्देश्यों से यहां आते हैं, न कि केवल पर्यटन के लिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि जेन-जी पीढ़ी तेजी से बदलती जीवनशैली, करियर के दबाव, मानसिक तनाव और अनिश्चित भविष्य के बीच आध्यात्मिक स्थिरता की तलाश में है। बाबा नीब करौरी महाराज का जीवन दर्शन—सेवा, भक्ति, प्रेम और सरलता—युवाओं को गहराई से आकर्षित कर रहा है। यही कारण है कि कैंची धाम अब केवल एक तीर्थ स्थल नहीं, बल्कि युवाओं के लिए आत्मचिंतन और मानसिक शांति का केंद्र बनता जा रहा है।
सोशल मीडिया ने भी इस आस्था को वैश्विक पहचान दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर कैंची धाम और बाबा नीब करौरी से जुड़े अनुभव, रील्स और वीडियो लगातार वायरल हो रहे हैं। कई युवा श्रद्धालु अपने निजी अनुभव साझा करते हुए बताते हैं कि कैंची धाम आकर उन्हें जीवन में सकारात्मक बदलाव महसूस हुआ।
धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, बाबा नीब करौरी महाराज की ख्याति पहले से ही देश-विदेश में फैली हुई है। एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स और फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग जैसे वैश्विक हस्तियों का नाम भी बाबा से जोड़ा जाता रहा है, जिससे युवाओं में इस स्थान को लेकर जिज्ञासा और आस्था दोनों बढ़ी हैं।
स्थानीय प्रशासन और आश्रम प्रबंधन के लिए भी यह बढ़ती भीड़ एक चुनौती बनती जा रही है। खासकर बड़े धार्मिक आयोजनों और मेलों के दौरान व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखना जरूरी हो गया है। बावजूद इसके, कैंची धाम की शांत, आध्यात्मिक और सकारात्मक ऊर्जा आज भी श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है।
कुल मिलाकर, कैंची धाम में जेन-जी युवाओं की बढ़ती उपस्थिति यह संकेत देती है कि आधुनिक पीढ़ी केवल तकनीक और भौतिक सुखों तक सीमित नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक जड़ों से जुड़ने की गहरी इच्छा भी रखती है।