मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति से उपजी त्रासदी ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इलाके में गंदा पानी पीने से बड़ी संख्या में लोग बीमार हो गए, वहीं अब तक कई लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इस गंभीर मामले को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए साफ शब्दों में कहा है कि लोगों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में पूरे घटनाक्रम की विस्तार से समीक्षा की गई और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई। इसके बाद मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक सर्जरी करते हुए नगर निगम के कई बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। कुछ अधिकारियों को हटाया गया, तो कुछ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
भागीरथपुरा क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से उल्टी, दस्त, पेट दर्द और बुखार जैसी शिकायतें तेजी से बढ़ने लगी थीं। देखते ही देखते अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ गई। जांच में सामने आया कि पेयजल की मुख्य पाइपलाइन में गंदे नाले या सीवेज का पानी मिल गया था, जिससे पूरे इलाके में दूषित पानी की आपूर्ति हो रही थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने पहले भी प्रशासन को इसकी शिकायत की थी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि इस मामले में केवल अस्थायी समाधान नहीं, बल्कि स्थायी और मजबूत व्यवस्था की जाए। जल आपूर्ति व्यवस्था की तकनीकी जांच, पाइपलाइनों की मैपिंग और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए ठोस कार्ययोजना बनाने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही दोषियों के खिलाफ विभागीय ही नहीं, बल्कि आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी।
राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को तत्काल मजबूत किया है। डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की अतिरिक्त तैनाती की गई है, मोबाइल मेडिकल यूनिट्स चलाई जा रही हैं और घर-घर जाकर लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है। गंभीर मरीजों के इलाज के लिए अस्पतालों में विशेष वार्ड बनाए गए हैं। सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि सभी पीड़ितों को मुफ्त इलाज मुहैया कराया जाएगा और मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता दी जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर शहरी बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष ने भी सरकार को घेरते हुए कहा है कि स्वच्छता और बेहतर नागरिक सुविधाओं के दावों की पोल इस घटना ने खोल दी है। वहीं, मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और जनता का भरोसा बहाल करने के लिए सरकार हर जरूरी कदम उठाएगी।
फिलहाल भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों में हालात पर कड़ी नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे उबला हुआ या वैकल्पिक सुरक्षित पानी ही इस्तेमाल करें। यह मामला न सिर्फ इंदौर, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक चेतावनी है कि बुनियादी सुविधाओं में लापरवाही कितनी भयावह साबित हो सकती है।