राज्य में होम्योपैथिक दवाओं की खरीद में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद आयुष विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। आयुष महानिदेशक ने वर्ष 2025-26 के अंतर्गत जेम (GeM) पोर्टल पर जारी की गई सभी होम्योपैथिक दवा निविदाओं की जांच के आदेश दे दिए हैं। इस संबंध में होम्योपैथिक निदेशक को समस्त पत्रावलियों के साथ 29 दिसंबर को मुख्यालय पर तलब किया गया है।
यह कार्रवाई होम्योपैथिक ड्रग्स मैन्युफैक्चरर्स संगठन, लखनऊ की ओर से की गई शिकायत के बाद की गई है। संगठन ने आरोप लगाया है कि दवा खरीद की प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन करते हुए प्रतिस्पर्धा को सीमित किया गया और चुनिंदा कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
शिकायत में कहा गया है कि जेम पोर्टल पर जारी कुछ निविदाओं में तकनीकी और शर्तों के माध्यम से केवल चार फार्मों को ही भाग लेने की अनुमति दी गई, जबकि अन्य पात्र और अनुभवी कंपनियों को बाहर कर दिया गया। इससे निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
संगठन का आरोप है कि निविदाओं की शर्तें इस तरह से तय की गईं, जिससे बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा समाप्त हो गई और कुछ चुनिंदा कंपनियों को सीधा फायदा मिला। इससे न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका है, बल्कि राज्य के सरकारी अस्पतालों और आयुष केंद्रों तक पहुंचने वाली दवाओं की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।
शिकायत में यह गंभीर आरोप भी लगाया गया है कि निविदाओं में एक विशेष ब्रांड की दवा को अनिवार्य कर दिया गया, जो सरकारी खरीद नियमों और जेम पोर्टल की गाइडलाइंस के विपरीत है। नियमों के अनुसार, किसी भी सरकारी खरीद में ब्रांड-न्यूट्रल प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए ताकि सभी योग्य निर्माताओं को समान अवसर मिल सके।
आयुष महानिदेशक कार्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान सभी निविदाओं की शर्तों, तकनीकी मानकों, भाग लेने वाली कंपनियों और चयन प्रक्रिया की बारीकी से समीक्षा की जाएगी। यदि जांच में अनियमितताएं पाई जाती हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ नियमों के तहत अन्य कठोर कदम भी उठाए जा सकते हैं।
विभाग का कहना है कि सरकारी खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस मामले की जांच पूरी होने तक भविष्य की निविदाओं को लेकर भी अतिरिक्त सतर्कता बरती जाएगी।
अब सबकी निगाहें 29 दिसंबर को होने वाली पेशी और जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि होम्योपैथिक दवा खरीद प्रक्रिया में वास्तव में नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।