बिहार के छपरा जिले से शुक्रवार देर रात एक हृदयविदारक हादसे की खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। वाराणसी में तैनात एक PCS अधिकारी के परिवार के पांच लोगों की दम घुटने से मौत हो गई, जबकि तीन की हालत गंभीर बनी हुई है। यह दर्दनाक हादसा ठंड से बचने के लिए कमरे में अंगीठी जलाकर सोने के दौरान हुआ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार PCS अफसर की पत्नी अपने दो मासूम बच्चों के साथ छुट्टियां मनाने के लिए बिहार के छपरा स्थित मायके आई हुई थीं। परिवार के अन्य सदस्य भी उसी घर में मौजूद थे। शुक्रवार रात कड़ाके की ठंड से बचने के लिए सभी लोग एक कमरे में अंगीठी जलाकर सो गए। रात गहराने के साथ कमरे में कार्बन मोनोऑक्साइड गैस भरती चली गई, जिससे सो रहे लोगों का दम घुटने लगा।
देर रात परिवार के एक सदस्य को बेचैनी और घुटन महसूस हुई। उसने किसी तरह खुद को संभालते हुए कमरे का दरवाजा खोला और बाहर निकलकर शोर मचाया। आवाज सुनकर घर के अन्य लोग मौके पर पहुंचे और कमरे में सो रहे लोगों को जगाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
परिजनों ने देखा कि PCS अफसर के मासूम बेटे और बेटी, उनकी सास और साढ़ू के एक बच्चे समेत कुल चार लोगों में कोई हलचल नहीं थी। आनन-फानन में सभी को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने चार को मृत घोषित कर दिया। बाद में इलाज के दौरान एक अन्य की भी मौत हो गई। इस हादसे में PCS अफसर की पत्नी, उनका साला और साढ़ू की पत्नी गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार तीनों की हालत नाजुक बनी हुई है और उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में दम घुटने को मौत का कारण बताया है। कमरे को सील कर दिया गया है और अंगीठी को कब्जे में लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह हादसा ठंड के मौसम में अंगीठी के प्रयोग से होने वाले खतरों की एक और दुखद मिसाल है।
इस हादसे की खबर मिलते ही वाराणसी और छपरा दोनों जगह अफसरों और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई। PCS अधिकारी के परिवार पर टूटे इस कहर से हर कोई स्तब्ध है। पड़ोसियों और रिश्तेदारों का घर पर तांता लगा हुआ है। मासूम बच्चों की मौत ने सभी को भीतर तक झकझोर दिया है।
प्रशासन ने लोगों से ठंड के मौसम में अंगीठी या कोयले का उपयोग बंद कमरे में न करने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि बंद कमरे में अंगीठी जलाने से निकलने वाली जहरीली गैस बिना किसी गंध के शरीर को नुकसान पहुंचाती है और व्यक्ति को संभलने का मौका भी नहीं देती।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और गंभीर रूप से घायल लोगों के बयान दर्ज होने का इंतजार किया जा रहा है। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सावधानी की जरूरत को रेखांकित कर दिया है।