• Last Update
प्लेटफार्म नंबर दो पर कुर्सी पर मृत मिला अधेड़, दो घंटे तक पड़ी रही डेड बॉडी, आरपीएफ–जीआरपी के बीच जिम्मेदारी को लेकर चला आरोप-प्रत्यारोप

भीषण ठंड की चपेट में आकर मुसाफिर की मौत, सुल्तानपुर जंक्शन पर मानवता शर्मसार

सुल्तानपुर। कड़ाके की ठंड के बीच सुल्तानपुर जंक्शन पर एक दर्दनाक और चिंताजनक घटना सामने आई है, जिसने रेलवे प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्लेटफार्म संख्या दो पर एक अधेड़ मुसाफिर की भीषण ठंड की चपेट में आने से मौत हो गई। सबसे हैरानी की बात यह रही कि मृतक का शव करीब दो घंटे तक प्लेटफार्म पर कुर्सी पर ही पड़ा रहा, लेकिन उसे समय रहते अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका। इस दौरान रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) के बीच जिम्मेदारी को लेकर आरोप-प्रत्यारोप चलता रहा, जिससे अधिकारियों की संवेदनहीनता उजागर हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सोमवार सुबह प्लेटफार्म संख्या दो पर एक अधेड़ व्यक्ति कुर्सी पर बैठा हुआ दिखाई दिया। वह काफी देर तक उसी अवस्था में रहा, जिससे यात्रियों को शक हुआ। पहले तो लोगों ने समझा कि वह आराम कर रहा है या किसी ट्रेन का इंतजार कर रहा है, लेकिन जब काफी समय बीत जाने के बाद भी उसके शरीर में कोई हलचल नहीं दिखी, तो यात्रियों ने स्टेशन पर मौजूद कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों को इसकी सूचना दी।

सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची सुरक्षा टीम ने जब उसकी जांच की तो पता चला कि उसकी मौत हो चुकी है। आशंका जताई जा रही है कि अत्यधिक ठंड के कारण उसकी तबीयत बिगड़ी और वहीं उसकी जान चली गई। बताया जा रहा है कि मृतक के पास ठंड से बचाव के लिए पर्याप्त कपड़े या कंबल नहीं थे। वह बेसहारा मुसाफिर प्रतीत हो रहा था, जिसकी पहचान तत्काल नहीं हो सकी।

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हुआ कि मृतक को सुल्तानपुर मेडिकल कॉलेज ले जाने की जिम्मेदारी किसकी थी। प्लेटफार्म पर मौजूद यात्रियों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद काफी देर तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। शव को करीब दो घंटे तक प्लेटफार्म पर ही छोड़ दिया गया, जिससे यात्रियों में आक्रोश फैल गया और रेलवे प्रशासन के खिलाफ नाराजगी देखने को मिली।

इस दौरान रेलवे सुरक्षा बल और जीआरपी के बीच जिम्मेदारी को लेकर टकराव की स्थिति बन गई। दोनों विभाग एक-दूसरे पर कार्रवाई में देरी का आरोप लगाते नजर आए। जीआरपी थानाध्यक्ष ने बताया कि रेलवे सुरक्षा बल की टीम अधेड़ युवक को अपने साथ ले गई है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। वहीं, मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि यदि दोनों सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय होता, तो शव को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकता था और स्थिति को अधिक संवेदनशील तरीके से संभाला जा सकता था।

यह घटना केवल एक मुसाफिर की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती है। हर साल सर्दियों के मौसम में स्टेशन परिसरों, फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों पर ठंड से जान जाने की घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन इसके बावजूद न तो स्थायी इंतजाम किए जाते हैं और न ही जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होती है।

यात्रियों और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सुल्तानपुर जंक्शन समेत सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर ठंड के मौसम में अलाव, कंबल वितरण और आपात चिकित्सा सुविधा की समुचित व्यवस्था की जाए। साथ ही, आरपीएफ और जीआरपी के बीच स्पष्ट जिम्मेदारी तय हो, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। यह घटना रेलवे प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया, तो ऐसे हादसे आगे भी होते रहेंगे।

You can share this news with others

करोड़ों की कमाई, फिर भी 10 हजार के पुरस्कार पर वही मुस्कान: विराट कोहली ने फिर सिखाया सम्मान का मतलब

अयोध्या में राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ का भव्य आयोजन, आज से शुरू हुए धार्मिक अनुष्ठान