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छात्रों में पढ़ने की आदत, सामान्य ज्ञान और भाषा कौशल बढ़ाने के उद्देश्य से योगी सरकार का बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश के स्कूलों में लागू हुआ नया शैक्षिक नियम, अब प्रार्थना के बाद अनिवार्य होगा अखबार पढ़ना

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के सरकारी और माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों की बौद्धिक क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से एक नया नियम लागू किया है। इस नियम के तहत अब सभी सरकारी, बेसिक और माध्यमिक स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा के बाद विद्यार्थियों के लिए अखबार पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इस पहल से छात्रों में पढ़ने की रुचि बढ़ेगी, सामान्य ज्ञान का विस्तार होगा और वे देश-दुनिया की ताजा घटनाओं से नियमित रूप से जुड़ सकेंगे।

शिक्षा विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक विद्यालय में प्रार्थना के बाद लगभग 10 से 15 मिनट का समय अखबार पढ़ने के लिए निर्धारित किया जाएगा। इस दौरान छात्रों को हिंदी के साथ-साथ अंग्रेज़ी अखबार भी उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि उनकी भाषा समझ, शब्दावली और अभिव्यक्ति क्षमता में सुधार हो सके। विद्यालय स्तर पर शिक्षकों की जिम्मेदारी होगी कि वे छात्रों को समाचारों के महत्व को समझाएं और प्रमुख खबरों पर संक्षिप्त चर्चा भी कराएं।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि आज के डिजिटल युग में बच्चे मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और वीडियो कंटेंट पर अधिक समय बिता रहे हैं, जिससे उनकी पढ़ने की आदत कमजोर होती जा रही है। अखबार पढ़ने की इस अनिवार्यता का उद्देश्य छात्रों को स्क्रीन से हटाकर सार्थक और ज्ञानवर्धक सामग्री की ओर प्रेरित करना है। इससे न केवल उनकी एकाग्रता बढ़ेगी, बल्कि समसामयिक विषयों पर सोचने और समझने की क्षमता भी विकसित होगी।

शिक्षा विभाग के अनुसार, यह नियम चरणबद्ध तरीके से सभी जिलों में लागू किया जा रहा है। जिन स्कूलों में अखबार की नियमित उपलब्धता नहीं है, वहां स्थानीय स्तर पर व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। कई विद्यालयों में पहले से ही पुस्तकालय और पठन-पाठन गतिविधियां चल रही थीं, अब इस नए नियम से उन्हें और अधिक संरचित रूप दिया जाएगा।

शिक्षाविदों और शिक्षकों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि अखबार पढ़ने से छात्रों में आलोचनात्मक सोच (क्रिटिकल थिंकिंग) विकसित होती है और वे सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं। साथ ही, इससे छात्रों की भाषा पर पकड़ मजबूत होती है और वे लिखित एवं मौखिक दोनों प्रकार की अभिव्यक्ति में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

हालांकि, कुछ अभिभावकों ने यह सुझाव भी दिया है कि अखबार पढ़ने के साथ-साथ शिक्षकों द्वारा उसका सरल विश्लेषण कराया जाए, ताकि छोटे कक्षा के छात्र भी खबरों को सही संदर्भ में समझ सकें। शिक्षा विभाग ने इस सुझाव को सकारात्मक बताते हुए कहा है कि विद्यालय स्तर पर नवाचार और चर्चा आधारित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।

कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश सरकार का यह नया नियम शिक्षा को पुस्तकीय ज्ञान से आगे ले जाकर व्यवहारिक और जागरूक बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो आने वाले समय में यह छात्रों के व्यक्तित्व विकास और सामाजिक समझ को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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