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“मां की रोटियां” — एक सच्ची प्रतीक्षा की कहानी

ठंडी सर्दियों की सुबह थी। धुंध की चादर में पूरा गांव लिपटा हुआ था। खेतों पर ओस चमक रही थी, और घरों के बाहर लोग अलाव जलाकर खुद को गर्म कर रहे थे

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