नई दिल्ली। आज पूरे देश में वीर बाल दिवस श्रद्धा, सम्मान और गर्व के साथ मनाया जा रहा है। यह दिवस सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी के वीर साहिबजादों—बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह—की अमर शहादत को समर्पित है। अल्पायु में ही धर्म, सत्य और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए दिया गया उनका सर्वोच्च बलिदान भारतीय इतिहास में अद्वितीय उदाहरण है।
वीर बाल दिवस के अवसर पर आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ प्रदान करेंगी। इस वर्ष देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चयनित 20 प्रतिभाशाली बच्चों को यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया जाएगा।
इन बच्चों को बहादुरी, खेल, सामाजिक सेवा, नवाचार, कला, संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और विज्ञान जैसे विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियों के लिए चुना गया है। कम उम्र में असंभव को संभव कर दिखाने वाले ये बच्चे आज के भारत की नई पहचान बन रहे हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, चयनित बच्चों ने न केवल व्यक्तिगत उपलब्धियाँ हासिल की हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणादायक कार्य भी किए हैं। किसी ने अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की रक्षा की, तो किसी ने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। खेल के मैदान से लेकर सामाजिक मंच तक, इन बच्चों ने अपने कार्यों से देश का नाम रोशन किया है।
वीर बाल दिवस की शुरुआत वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य साहिबजादों की शहादत को नई पीढ़ी तक पहुँचाना और बच्चों में साहस, आत्मबल, नैतिकता और देशभक्ति जैसे मूल्यों को सशक्त करना है। यह दिन यह संदेश देता है कि उम्र छोटी हो सकती है, लेकिन हौसला और बलिदान महान होता है।
आज के दिन देशभर के स्कूलों, कॉलेजों, गुरुद्वारों और सामाजिक संस्थाओं में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। बच्चों को साहिबजादों के जीवन और बलिदान की कहानियाँ सुनाई जा रही हैं, ताकि वे सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा ले सकें।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा बाल पुरस्कार प्रदान किया जाना इस संदेश को और मजबूत करता है कि राष्ट्र अपने होनहार और साहसी बच्चों को पहचानता है और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह सम्मान न केवल पुरस्कार पाने वाले बच्चों के लिए, बल्कि पूरे देश के बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
वीर बाल दिवस हमें यह याद दिलाता है कि भारत का भविष्य उसके बच्चों के हाथों में है और जब बच्चों को सही दिशा, सम्मान और अवसर मिलता है, तो वे इतिहास रचने की क्षमता रखते हैं।