राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के हिंदू राष्ट्र से जुड़े बयान का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने खुलकर समर्थन किया है। नकवी ने कहा कि अगर भारत में हिंदू बहुसंख्यक नहीं होते, तो पंथनिरपेक्षता की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। उन्होंने इसे भारत की सनातन और समावेशी संस्कृति का परिणाम बताया।
मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि भारत की पहचान विविधता में एकता से है। यहां अलग-अलग धर्म, पंथ, भाषा और संस्कृति के लोग होने के बावजूद मिल-जुलकर काम करना देश की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि यह हिंदू समाज की सहिष्णु और समावेशी सोच का ही नतीजा है कि भारत एक हिंदू बहुल राष्ट्र होने के बावजूद पूरे विश्व में पंथनिरपेक्षता का ध्वजवाहक बना हुआ है।
नकवी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान का भी समर्थन किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि राहुल गांधी को अभी और चुनाव हारने हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए नकवी ने तीखा तंज कसते हुए कहा, “राहुल गांधी और कांग्रेस के नेता जितना शोर मचाते हैं, जनता उनकी उतनी ही जोरदार धुनाई करती है।” उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता ही सबसे बड़ा निर्णायक होती है और बार-बार के चुनावी नतीजे कांग्रेस की नीतियों और नेतृत्व पर जनता के भरोसे की कमी को दर्शाते हैं।
मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि कांग्रेस को आत्ममंथन करने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सत्ता के बिना खुद को संभाल नहीं पाती। नकवी ने कहा, “कांग्रेस का इतिहास रहा है कि जब-जब वह सत्ता से बाहर रही है, वह टूटी और बिखरी नजर आई है, क्योंकि बिना सत्ता के कांग्रेस रह नहीं सकती।”
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी नकवी ने तीखा हमला बोला। उन्होंने राज्य में मंदिर निर्माण के मुद्दे पर ममता बनर्जी की राजनीति को अवसरवादी बताया। नकवी ने कहा, “ममता बनर्जी अपनी ही चालाकी के जाल में फंस रही हैं। पहले उन्होंने बाबरी मस्जिद का मुद्दा उठाया, फिर जब उन्हें लगा कि सिर्फ बाबर का नाम लेने से कुछ हासिल नहीं होगा, तो बात संभालने की कोशिश की। अब उन्होंने मंदिरों का मुद्दा उठा दिया है। इस तरह वह चतुराई के चक्रव्यूह में खुद ही उलझती जा रही हैं।”
बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति पर भी मुख्तार अब्बास नकवी ने गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश को “जल्लादी और जिहादी जालिमों” ने हाईजैक कर लिया है। नकवी के अनुसार, वहां जो कुछ हो रहा है, वह किसी भी देश के लिए शुभ संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ देख रही है और सभी पहलुओं पर नजर बनाए हुए है।
इसके अलावा, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह पर निशाना साधते हुए नकवी ने कहा कि कांग्रेस के नेता आरएसएस को कोसते-कोसते “कोसी नदी के किनारे” तक पहुंच चुके हैं। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि कांग्रेस का पूरा राजनीतिक एजेंडा अब सिर्फ विरोध और आरोप-प्रत्यारोप तक सिमट गया है।
कुल मिलाकर, मुख्तार अब्बास नकवी के बयान से साफ है कि भाजपा हिंदू राष्ट्र और पंथनिरपेक्षता को परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे का पूरक मानती है। वहीं, विपक्ष पर हमलावर रुख अपनाते हुए नकवी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि भाजपा अपनी विचारधारा और राजनीति को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है।