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राज्यमंत्री असीम अरुण के सख्त निर्देश, हर कर्मचारी का डॉक्यूमेंट्स व पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य

फर्जी नियुक्तियों पर लगेगी लगाम, आउटसोर्सिंग भर्तियों के लिए होगा स्पष्ट शासनादेश

मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के अंतर्गत फर्जी अभिलेखों के आधार पर कुछ कोर्स कोऑर्डिनेटरों द्वारा नियुक्ति प्राप्त किए जाने के मामलों के सामने आने के बाद समाज कल्याण विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए विभाग में आउटसोर्सिंग के माध्यम से की जाने वाली नियुक्तियों को लेकर स्पष्ट और कठोर शासनादेश जारी करने के निर्देश दिए हैं।

राज्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़े की कोई गुंजाइश न रहे, इसके लिए आउटसोर्सिंग से जुड़ी सभी नियुक्तियों को पूरी तरह पारदर्शी और नियमबद्ध बनाया जाएगा। शासनादेश के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी नियुक्तियां तय मानकों, नियमों और प्रक्रियाओं के तहत ही हों।

आउटसोर्सिंग नियुक्तियों पर सख्ती

असीम अरुण ने स्पष्ट किया कि समाज कल्याण विभाग में आउटसोर्सिंग के जरिए होने वाली भर्तियों में अब किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नियुक्ति से पहले संबंधित अभ्यर्थी के सभी शैक्षिक, तकनीकी और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की गहन जांच अनिवार्य रूप से की जाए।

इसके साथ ही शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त प्रत्येक कर्मचारी का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा। बिना पुलिस सत्यापन के किसी भी कर्मचारी को कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

तीन महीने में होगी मौजूदा कर्मियों की जांच

राज्यमंत्री ने वर्तमान में समाज कल्याण विभाग में कार्यरत सभी आउटसोर्सिंग कर्मियों के दस्तावेजों की भी समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अगले तीन महीनों के भीतर सभी मौजूदा कर्मचारियों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों, पहचान पत्रों और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच पूरी की जाए।

इस प्रक्रिया के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि कहीं किसी कर्मचारी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तो नियुक्ति प्राप्त नहीं की है। यदि जांच के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़ा सामने आता है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

असीम अरुण ने दो टूक शब्दों में कहा कि समाज कल्याण विभाग जनसेवा से जुड़ा विभाग है और यहां किसी भी तरह की गड़बड़ी या भ्रष्टाचार को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना जैसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का उद्देश्य जरूरतमंद और प्रतिभाशाली छात्रों को बेहतर अवसर देना है, ऐसे में यदि इसमें फर्जी नियुक्तियों जैसी घटनाएं होती हैं तो यह बेहद गंभीर विषय है।

राज्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि भविष्य में आउटसोर्सिंग एजेंसियों की भूमिका और जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट किया जाए, ताकि एजेंसियों द्वारा गलत या अपूर्ण जानकारी के आधार पर नियुक्ति न की जा सके। आवश्यकता पड़ने पर दोषी एजेंसियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

सख्त कार्रवाई के संकेत

उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां भी नियमों के उल्लंघन या फर्जीवाड़े के प्रमाण मिलेंगे, वहां न केवल संबंधित कर्मचारी बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों पर भी कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। सरकार का उद्देश्य व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और भरोसेमंद बनाना है।

इस पहल से न सिर्फ फर्जी नियुक्तियों पर रोक लगेगी, बल्कि समाज कल्याण विभाग की कार्यप्रणाली में विश्वास और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

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