वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में रविवार देर रात कांग्रेस और उसकी छात्र इकाई एनएसयूआई द्वारा किए गए प्रदर्शन ने सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी। “मनुस्मृति बनाओ संग्राम” अभियान के तहत आयोजित इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी सहित कुल 30 कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम किया और कानून-व्यवस्था को बाधित करने का प्रयास किया, जबकि कांग्रेस नेताओं ने पुलिस कार्रवाई को एकतरफा और अलोकतांत्रिक बताया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कांग्रेस कार्यकर्ता अपने तय कार्यक्रम के तहत विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी तेज हो गई और देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने मुख्य मार्ग पर जाम लगाने की कोशिश की, जिससे यातायात बाधित हुआ और आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की हुई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अफरा-तफरी के माहौल में एनएसयूआई अध्यक्ष वरुण चौधरी सड़क पर गिर पड़े, जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें संभालते हुए पुलिस वाहन तक पहुंचाया। हालांकि कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि उन्हें जबरन घसीटकर पुलिस वैन में बैठाया गया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जिनमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव साफ दिखाई दे रहा है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई आवश्यक थी। वाराणसी पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं ली गई थी और अचानक सड़क पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के जमा होने से स्थिति बिगड़ सकती थी। इसी के चलते धारा संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर सभी 30 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। बाद में कुछ को निजी मुचलके पर छोड़े जाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई।
वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन था और सरकार के दबाव में पुलिस ने कार्यकर्ताओं पर अनावश्यक बल प्रयोग किया। कांग्रेस प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार है, लेकिन सरकार असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।
घटना के बाद वाराणसी का सियासी माहौल गर्मा गया है। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए, तो प्रदेशभर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। वहीं पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश में राजनीतिक विरोध, पुलिस कार्रवाई और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर बहस छेड़ दी है।