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खाताधारकों के खातों से बिना जानकारी लाखों रुपये गायब, बैंक परिसर में हंगामा, एक महिला खाताधारक बेहोश

डॉ. शकुंतला पुनर्वास विश्वविद्यालय स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में करोड़ों की ठगी का आरोप, बैंक मित्र पर गंभीर सवाल

डॉ. शकुंतला पुनर्वास विश्वविद्यालय परिसर में स्थित बैंक ऑफ़ बड़ौदा की शाखा में बड़े वित्तीय घोटाले का मामला सामने आने से बैंकिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बैंक शाखा में कार्यरत बैंक मित्र शिवा राव पर ग्राहकों से करोड़ों रुपये की ठगी करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। पीड़ित खाताधारकों का कहना है कि उनके खातों से बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के भारी रकम निकाल ली गई।

पीड़ितों के अनुसार किसी खाताधारक के खाते से करीब 33 लाख रुपये, किसी के खाते से 15 लाख रुपये तो किसी अन्य ग्राहक के खाते से लगभग 10 लाख रुपये अचानक गायब हो गए। जब खाताधारकों ने अपने खातों का विवरण जांचा, तब इस कथित ठगी का खुलासा हुआ। कई ग्राहकों ने बताया कि उन्होंने न तो कोई निकासी की थी और न ही किसी को अपने खाते से लेन-देन की अनुमति दी थी।

घटना की जानकारी मिलते ही बैंक परिसर में अफरा-तफरी मच गई। बड़ी संख्या में पीड़ित ग्राहक बैंक शाखा के बाहर जमा हो गए और बैंक प्रबंधन के खिलाफ जमकर नाराजगी जाहिर की। इसी दौरान एक महिला खाताधारक अपने खाते से लाखों रुपये गायब होने की खबर सुनकर सदमे में आ गई और बैंक के बाहर बेहोश हो गई। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उसे संभाला और पानी पिलाया।

ग्राहकों का आरोप है कि बैंक मित्र को अत्यधिक अधिकार दिए गए थे, लेकिन उसके कार्यों की समय-समय पर निगरानी नहीं की गई। लोगों का कहना है कि बैंक प्रबंधन की लापरवाही के कारण ही यह बड़ा घोटाला संभव हो सका। पीड़ित खाताधारकों ने यह भी आरोप लगाया कि पहले भी कुछ शिकायतें की गई थीं, लेकिन उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया।

इस पूरे मामले ने बैंकिंग सिस्टम पर आम लोगों के भरोसे को गहरा झटका दिया है। खाताधारकों का कहना है कि जब बैंक जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली संस्था में भी उनकी जमा पूंजी सुरक्षित नहीं है, तो आम आदमी किस पर भरोसा करे। कई ग्राहकों ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी खो देने की आशंका जताई है।

मामले की सूचना पुलिस को दे दी गई है। पुलिस ने बैंक प्रबंधन से दस्तावेज़ और लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड मांगे हैं और प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, बैंक प्रबंधन की ओर से फिलहाल आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन आंतरिक जांच की बात कही जा रही है।

स्थानीय लोगों और पीड़ित खाताधारकों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को कड़ी सजा मिले। साथ ही, पीड़ितों की रकम जल्द से जल्द वापस दिलाने की भी मांग की जा रही है। इस घटना ने न सिर्फ बैंक की कार्यप्रणाली बल्कि प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

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